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कविता

खटीमा विकासखंड के ग्राम सभा बिरिया की कवित्री बसंती सामंत ने पर्वत प्रेरणा न्यूज को अपनी स्वरचित कविता भेजी है। समाजसेवी कवित्री बसंती सामंत को क्षेत्र में अनेकों सम्मान मिल चुके हैं। जिसमें अब तक काव्य प्रभा कवि 2020 व काव्य मंजरी 2021 एवं अटल हिंदी 2020 उत्तराखंड नारी शक्ति सागर 2021 से नवाजा जा चुका है।
उत्तराखंड नारी गौरव सम्मान 2021 से भी नवाजा जा चुका है।

आज तुम्हें अस्पताल छोड़कर घर आया जैसे ही।

ऐसा लग रहा था मुझे मानो अपना एक हिस्सा छोड़ आया हूं कहीं दूर,, अस्पताल जाते समय तुम्हें देख रहा था।

बेबस था तुम्हारी तकलीफ जानकर भी कुछ नही कर पा रहा था।
आज पहला ऐसा मौका था, जब तुम मुझे संभालने की बजाय खुद बेसुध थी।।

पूरे रास्ते में मैं यही सोच रहा था कि कितनी आसानी से तुम मुझे संभाल लेती थी हर बार,, और मैं एक बार भी कुछ नही कर पा रहा था।

डॉक्टरो ने जब मुझे बाहर जाने को कहा।
ऐसा लगा जैसे तुम निकल गई हो मेरे भीतर से।

मुझे शरीर के किसी हिस्से को काटने सा दर्द हुआ।
पर मैं किससे कहता, कैसे रोता मैं आदमी हूं ना,,
घर की दहलीज पर कदम रखते ही
पैर कांपने लगे मेरे,, मैं वहीं पर बैठ गया, थोड़ी देर बाद जब बच्चों को पता चला वह बाहर आए मुझे भीतर ले गए।

मैं चुपचाप एक छोटे से बच्चे के समान उनके दिशा निर्देशों का पालन करने लगा।

अगर तुम अभी यहां होती तो मैं कोई शासक की भांति भीतर कदम रखता। मैं यह भी जानता हूं,

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तुम्हारे घर से दूर जाते ही,, मेरी सारी बादशाहत छीन गई।
बच्चों ने खबर ली मां की और अपने अपने कार्यो में व्यस्त हो गए।

और मैं चुपचाप सा अपने कमरे मे बिस्तर पर पसर गया।
आज कोई नहीं है मुझे टोकने वाला
पर मुझे अच्छा नहीं लग रहा था।

तुम्हारी तस्वीर को देखते कब नींद आ गई। पता ही नहीं लगा बेटे ने खाने के लिए आवाज लगाई तब नींद खुली।
पर वो तुम्हारा आवाज लगाना उस और इस आवाज में फर्क था। जो आज मुझे पता चला, मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा।

क्योंकि मैं नहीं रह पाऊंगा अपने शरीर के इस अमूल्य हिस्से के बिना
आज मुझे एहसास हुआ कि तुम हो तो मेरी बादशाहत है। तुम हो तो मैं हूं।।

संवाददाता:-गौरव शर्मा टनकपुर

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