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उत्तराखण्ड

प्रदीप के जज्बे को सलाम, सेना में भर्ती होने को रोज दौड़ता है नोएडा की सड़कों पर, देखें सोशल मीडिया में वायरल वीडियो

सोशल मीडिया पर आज के दौर में कई वीडियो वायरल होती रहती है लेकिन इस समय एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रही है जिसने पूरे देश में लोगों का दिल जीत लिया है और यह वीडियो दिल्ली की सड़कों में अल्मोड़ा के 19 वर्ष के युवक के दौड़ की वीडियो है। उत्तराखंड का यह युवक फौज में जाना चाहता है।

बताया गया है कि सड़क पर तेज रफ्तार से दौड़ता यह किशोर राज्य के अल्मोड़ा जिले का रहने वाला है। इसका नाम प्रदीप मेहरा है, जो परिवार की विषम परिस्थितियों के खातिर मेकडानाल्ड में नौकरी करता है। परंतु विपरीत परिस्थितियां भी सेना में भर्ती होने के उसके बुलंद हौसलों को तोड़ नहीं पाती। दिनभर मेहनतकश मजदूरी करने के उपरांत छुट्टी से घर को जाते समय चेहरे पर मासूम सी हंसी लिए वह अपने सपनों को साकार करने के लिए जीतोड़ मेहनत करता है और कई किमी तक दौड़ता है।

प्रदीप को इस तरह बीच सड़क पर अंधाधुंध दौड़ता हुआ देखकर उत्तराखंड मूल के फिल्मकार विनोद कापड़ी ने उसे कार से घर छोड़ने का ऑफर दिया, लेकिन बार-बार अनुरोध के बावजूद वह यह कहते हुए मना कर देता है कि वह दौड़ते हुए ही जाएगा, उसे दौड़ने का समय ही अभी मिलता है। प्रदीप के इन बुलंद हौसलों को बयां करते हुए विनोद ने ही सबसे पहले इसका विडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने विडियो साझा करते हुए लिखा कि रात 12 बजे उन्हें यह लड़का कंधे में बैग टांगे बहुत तेज दौड़ता नजर आया। उन्होंने लिखा, उसके दौड़ने की वजह सुनेंगे तो आपको इस लड़के से प्यार हो जाएगा।

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फिर क्या था देखते ही देखते यह विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।सेना में भर्ती होने की बात करते हुए वह कहता है कि वह भर्ती की तैयारी कर रहा है। सुबह उसे ड्यूटी पर जल्दी जाना होता है और खाना भी बनाना होता है। विडियो में कापड़ी, प्रदीप से उसके माता पिता के बारे में पूछते हुए पहाड़ी में कहते हैं कि “ईजा-बौजू का छन” तो वह बताता है कि मां बीमार है और अस्पताल में भर्ती है, पिता भी उन्हीं के साथ है। यहां वह अपने भाई के साथ रहता है। वह रोज दस किलोमीटर दौड़ कर भर्ती की तैयारी कर रहा है। घर पहुंचकर उसे बड़े भाई के लिए खाना भी बनाना होता है। यह है तो विडियो के चंद शब्द लेकिन पहाड़ की दुखभरी दास्तां को बयां कर जाते हैं। प्रदीप के ये शब्द उन राजनीतिक दलों के लिए भी एक तमाचे की तरह है जो अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखण्ड की सत्ता पर विराजमान रहें। मेहनतकश प्रदीप का मासूम चेहरा बस यही सवाल पूछ रहा है कि पहाड़ के पानी और पहाड़ की जवानी के नाम पर वोट मांगने वाले राजनीतिक दलों के लोग क्या उस जैसे हजारों नौनिहालों का दर्द समझ पाएंगे।नोएडा की व्यस्ततम सड़क, अंधाधुंध तेज रफ्तार से दौड़ती गाड़ियों के बीच जहां चंद कदम चलना भी लोगों को गवारा नहीं जाता वहीं उन सबके बीच मध्यरात्रि के घने अंधेरे में, एक लड़का तेज रफ्तार से दौड़ रहा है। एक पल के लिए तो ऐसा लग रहा है जैसे कोई मैराथन चल रही हों। लेकिन ये क्या, न तो उस लड़के के आगे ही कोई प्रतिद्वंदी है और ना ही प्रतिभागी पीछे से उसे पछाड़ने की कोशिश कर रहा है।

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मां अस्पताल में भर्ती है बावजूद इसके उसके चेहरे पर कोई सिकन नहीं है। बिना किसी की परवाह किए, आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने लिए, पसीने से लथपथ इस मेहनतकश किशोर का एक विडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। चंद मिनटों का यह विडियो न सिर्फ पहाड़ की पीड़ा को बयां करता है बल्कि यहां के नौनिहालों के सपनों और साहस के साथ ही उनके बुलंद हौसलों से रूबरू कराता है।

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