उत्तराखण्ड
हल्द्वानी की सड़कों पर उतरी पर्वतीय संस्कृति की झलक
पर्वत प्रेरणा संवाददाता
उदयवीर सिंह
हल्द्वानी।शहर की सड़कों पर उस समय पर्वतीय संस्कृति की जीवंत झलक देखने को मिली, जब पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, ढोल-दमाऊं और छोलिया नृत्य की गूंज ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया। आयोजन के दौरान कुमाऊं और गढ़वाल की समृद्ध लोकपरंपराएं आमजन के सामने जीवंत रूप में प्रस्तुत हुईं।
कार्यक्रम में महिलाओं ने पिछौड़ा, पुरुषों ने पारंपरिक परिधान धारण कर लोकनृत्य प्रस्तुत किए, वहीं ढोल-दमाऊं की थाप पर युवाओं का उत्साह देखते ही बनता था। छोलिया नृत्य, झोड़ा-चांचरी और लोकगीतों ने दर्शकों को पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ दिया।
आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को पर्वतीय संस्कृति, लोककला और पारंपरिक मूल्यों से परिचित कराना था। सांस्कृतिक जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुज़रा, जहां बड़ी संख्या में नागरिकों ने रुककर कार्यक्रम का आनंद लिया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
स्थानीय सांस्कृतिक संगठनों का कहना है कि ऐसे आयोजन न केवल पहाड़ की पहचान को सहेजने का कार्य करते हैं, बल्कि शहरों में बसे पर्वतीय समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं।
हल्द्वानी की सड़कों पर उतरी यह सांस्कृतिक छटा यह संदेश देती नजर आई कि आधुनिकता के बीच भी पर्वतीय लोकसंस्कृति आज भी जीवंत और प्रासंगिक है।







हीरा नगर मेले में झाकियों के भव्य नगर भ्रमण, हुकुम सिंह कुंवर व खड़क सिंह बगढ़वाल ने आमजन को संबोधित
हल्द्वानी। पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच द्वारा आयोजित सात दिवसीय मेले का आज नगर भ्रमण कार्यक्रम भव्य झाकियों के साथ संपन्न हुआ। मंच प्रांगण से शुरू हुई झाकियों ने शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए पर्वतीय समाज की सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं और एकता को प्रदर्शित किया।
मंच द्वारा आयोजित झाकियों में एक से बढ़कर एक आकर्षक और कलात्मक झांकियों का प्रदर्शन किया गया। प्रत्येक झांकी में पर्वतीय जीवन, लोक संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक संदेशों को दर्शाया गया। नगर भ्रमण के दौरान हजारों नागरिकों ने झाकियों का आनंद लिया और आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर उत्थान मंच के संरक्षक हुकुम सिंह कुंवर और अध्यक्ष खड़क सिंह बगढ़वाल ने यात्रा शुरू होने से पहले आमजन को संबोधित किया। उन्होंने मेले की महत्ता, पर्वतीय संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक एकता और लोक कला को बढ़ावा देने के संदेश दिए। उन्होंने लोगों से सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक रहने और उसे संरक्षित करने की अपील भी की।
पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के अध्यक्ष ने बताया कि यह मंच हर वर्ष इस तरह के मेले का आयोजन करता है, जिसका उद्देश्य न केवल पर्वतीय समाज की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करना है, बल्कि युवाओं में लोक कला और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति रुचि जागृत करना भी है।
मेला और झाकियों का यह भव्य प्रदर्शन नगरवासियों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा। पूरे नगर में उत्सव का माहौल देखा गया और उपस्थित लोगों ने झाकियों की प्रस्तुति की जमकर सराहना की।
यह आयोजन पर्वतीय समाज में एकता, सांस्कृतिक चेतना और लोक परंपराओं के संरक्षण का प्रतीक बनकर उभरा, जबकि मंच के पदाधिकारी और स्वयंसेवकों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उत्तरायणी मेला एवं मकर संक्रांति के अवसर पर पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच की ओर से शहर में भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में कुमाऊं की लोक संस्कृति, परंपराओं और पर्व-त्योहारों की जीवंत झलक देखने को मिली। सड़कों के दोनों ओर खड़े लोगों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। शोभायात्रा की शुरुआत हीरानगर स्थित पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच परिसर से गोल्ज्यू देवता के जयकारों के साथ हुई। संरक्षक हुकुम सिंह कुंवर, अध्यक्ष खड़क सिंह बगडवाल सहित मंच के पदाधिकारियों ने विधिवत यात्रा को रवाना किया। यात्रा कालाढूंगी रोड, नैनीताल रोड, रोडवेज बस स्टेशन चौराहा, तिकोनिया, प्रेम सिनेमा, स्टेशन रोड, रेलवे बाजार, नया बाजार, मीरा मार्ग, सिंधी चौराहा और कालाढूंगी चौराहा होते हुए पुनः उत्थान मंच परिसर में समाप्त हुई। हजारों की संख्या में शहरवासियों ने शोभायात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसमें बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। सांस्कृतिक शोभायात्रा में श्री केदारनाथ, नंदा देवी, जागर, भैरव पूजा, सातूं-आठूं पर्व सहित करीब 30 मनमोहक झांकियां इस बार शामिल हुई जिन्होंने कुमाऊं और गढ़वाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया। कुमाऊं के लोकदेवता गोल्ज्यू के अल्मोड़ा स्थित चितई मंदिर के प्रतिरूप वाली झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। सीमांत बरपटिया (ज्येष्ठरा) जनजाति उत्थान समिति, मुनस्यारी की झांकी ने विशेष रूप से सभी का मन मोह लिया। इधर, नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा ढोल-दमाऊ बजाते हुए प्रस्तुत उत्साहपूर्ण प्रदर्शन ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कुमाऊंनी परिधान और पिछौड़ा ओढ़े महिलाओं के समूह ने झोड़ा नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि पुरुषों के समूह ने वाद्य यंत्रों की धुन पर छलिया नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी। शोभायात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर कलाकारों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। घरों की छतों और सड़कों के किनारे खड़े लोग संस्कृति की इस अनुपम झलक को निहारते रहे। उत्तरायणी मेले के आठवें दिन निकली इस शोभायात्रा ने हल्द्वानी को कुमाऊं की लोकसंस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। वहीं देर सायं सांस्कृतिक संख्या में सूरज प्रकाश और पवन कार्की के गीतों ने जमकर धमाल मचाया। लोगों ने उनके केवल गीतों पर जमकर झूम उठे। पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच में चल रहे उत्तरायणी महोत्सव का गुरूवार को पुरस्कार वितरण के साथ समापन होगा।
इस मौके पर मंच के संरक्षक हुकुम सिंह कुंवर, अध्यक्ष खड़क सिंह बगड़वाल, उपाध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट, सचिव देवेंद्र तोलिया, कोषाध्यक्ष त्रिलोक बनोली, लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, पूर्व सांसद, डा. महेंद्र पाल सिंह, कैलाश जोशी, हेम भट्ट, शोभा बिष्ट, चंद्रशेखर परगाई, भुवन जोशी, नीरज बगड़वाल, ललित बिष्ट, जे. ललित प्रसाद धर्म सिंह बिष्ट, ब्रजमोहन बिष्ट, संदीप भैंसोड़ा, कमल किशोर, रितिक आर्य, तरुण नेगी, पार्षद मनोज जोशी, पार्षद शैलेंद्र दानू, रत्ना श्रीवास्तव, पुष्पा सम्भल, हेमंत बगडवाल, हरीश मेहता, पंकज सुयाल समेत हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे।









