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उत्तराखण्ड

तुंगनाथ मंदिर की जर्जर हालत पर उठे सवाल, पंच पुरोहित बोले, “करोड़ों की आय के बावजूद नहीं हो रहा संरक्षण”

संदीप बर्थ्वाल/पर्वत प्रेरणा ब्यूरो

चमोली। उत्तराखंड के चमोली जनपद में गोपेश्वर से लगभग 40 किमी दूर चौपता स्थिति तुंगनाथ मंदिर की हालत लगातार चिंताजनक होती जा रही है। मंदिर का एक हिस्सा जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है और स्थानीय पुजारियों के अनुसार वह कभी भी गिर सकता है। बावजूद इसके, अब तक शासन-प्रशासन और संबंधित  रख रखाव करने वाली समिति की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। मंदिर से जुड़े पंच पुरोहित अध्यक्ष रिवाधर मैठाणी ने बताया कि हर वर्ष यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन मंदिर की सुरक्षा और संरक्षण के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं हो पा रही हैं। उनका कहना है कि मंदिर की दीवारों और संरचना में दरारें बढ़ती जा रही हैं, जिससे बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है और कभी भी कोई बड़ा हादसा यहाँ हो सकता है।

श्री मैठाणी ने सरकार और रख – रखाव करने वाली मंदिर समिति से मांग की है कि त्वरित निरीक्षण कर मंदिर के संरक्षण और मरम्मत कार्य शुरू किए जाएं, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था के इस केंद्र को सुरक्षित रखा जा सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक न तो यहाँ कभी क्षेत्रीय विधायक आये और न ही सरकार का कोई मंत्री मंदिर की स्थिति देखने पहुंचा है। उनका कहना है कि तुंगनाथ मंदिर समिति द्वारा करोड़ों रुपये की राशि सरकार को दी जा रही है, लेकिन मंदिर के रखरखाव पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया जा रहा। श्री मैठाणी ने कहा कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बैठने के लिए दरी तक की व्यवस्था नहीं है, जबकि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर समिति की ओर से बुनियादी सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कैंची धाम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां तेजी से व्यवस्थाएं विकसित की गईं और वन क्षेत्र से संबंधित समस्याओं का भी समाधान हुआ, लेकिन तुंगनाथ मंदिर के संरक्षण और विकास के लिए अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई ।

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