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उत्तराखण्ड

एटीएस व्यवस्था के विरोध में टैक्सी संचालक उग्र, 4 फरवरी से अनिश्चितकालीन चक्का जाम की चेतावनी

पर्वत प्रेरणा संवाददाता

हल्द्वानी/अल्मोड़ा/पिथौरागढ़। कुमाऊँ मण्डल में टैक्सी एवं व्यावसायिक वाहन संचालकों की समस्याओं को लेकर असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। ATS केन्द्रों की अनिवार्यता, नैनीताल शहर में व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश प्रतिबंध और यात्री कर माफी से जुड़े मुद्दों को लेकर टैक्सी संचालकों ने शासन-प्रशासन के विरुद्ध आंदोलन का ऐलान किया है।
महासंघ टैक्सी यूनियन कुमाऊँ मण्डल के बैनर तले संचालकों ने बताया कि शासन द्वारा लागू ATS केन्द्रों की बाध्यता के कारण वाहन स्वामियों का आर्थिक शोषण हो रहा है। यूनियन ने मांग की है कि ATS केन्द्रों की अनिवार्यता समाप्त कर पूर्व की भांति परिवहन कार्यालयों में फिटनेस व्यवस्था बहाल की जाए तथा ATS को केवल विकल्प के रूप में रखा जाए।
टैक्सी संचालकों ने नैनीताल शहर में व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि माननीय उच्च न्यायालय में सरकार को टैक्सी संचालकों का पक्ष मजबूती से रखना चाहिए। साथ ही जिस प्रकार उत्तराखंड के बाहर के व्यावसायिक वाहनों का नैनीताल में प्रवेश प्रतिबंधित है, उसी तरह सभी राज्यों के व्यावसायिक वाहनों एवं शासन द्वारा अनुबंधित वाहनों के प्रवेश पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
यूनियन ने पूर्व परिवहन सचिव अरविन्द सिंह ह्योंकी द्वारा जारी यात्री कर माफी के शासनादेश को पुनः लागू करने की भी मांग की है, जिससे परिवहन व्यवसायियों को आर्थिक राहत मिल सके।
महासंघ टैक्सी यूनियन ने बताया कि दिनांक 31 जनवरी 2026 को अल्मोड़ा, बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ में जिलाप्रशासन, परिवहन विभाग और टैक्सी संचालकों के बीच इस विषय पर बैठक हुई थी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।
बैठक के बेनतीजा रहने से आक्रोशित टैक्सी संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र शासनादेश जारी नहीं किया गया तो दिनांक 03 फरवरी 2026 को कुमाऊँ मण्डल के सभी जनपदों से टैक्सी संचालक भारतीय जनता पार्टी से सामूहिक त्यागपत्र देंगे। इसके बाद 04 फरवरी 2026 से समस्त टैक्सी संचालक अनिश्चितकालीन चक्का जाम आंदोलन शुरू करने को विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
टैक्सी यूनियन के इस ऐलान के बाद कुमाऊँ मण्डल में परिवहन व्यवस्था के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

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