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कुमाऊँ

उन्होंने गौ माता को भगाया, नीलू ने अपनाया

हल्द्वानी। जब तक था लोगों ने खूब दूध पिया, बेचा भी, फिर बेघर कर सड़कों में छोड़ दिया। यह सब किसने किया यह तो नहीं बता सकते हैं, इतना जरूर बता सकते हैं कि नीलू कांडपाल इन बेघर हुए, गाय, बछड़े, की भरपूर सेवा में लगे हैं।

चम्बल पुल दमुवादूँगा में अपने बल बूते लंबे समय से नीलू कांडपाल गौ माता की सेवा कर रहे हैं। चंबल पुल लालढांठ के पास कांडपाल ने किराये की जमीन लेकर आवारा, बेघर हुए पशुओं की सेवा आरम्भ की है। एक्सीडेंटल गाय, बछड़े को भी हट बनाकर उपचार कराया जा रहा है। बर्तमान में इनके पास 30 गाय, बछड़े हैं। नीलू का कहना है कि अब उन्होंने अपना जीवन इन्हीं की सेवा में समर्पित कर दिया है। इससे अच्छी सेवा कोई नहीं है। वह सुबह उठते ही बेघर हुई गाय को खोजने लगते हैं। जहां दिखाई दिया उन्हें बटौर कर ले आते हैं।
-दिनेश सिंह राणा

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