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उत्तराखण्ड

जिला संघर्ष समिति के आह्वान पर 24 को निकलेगा मशाल जुलुस

रानीखेत। चार घोषित जिलों की संघर्ष समिति के संरक्षक डी एन बड़ोला ने जानकारी देते हुए बताया कि 15 अगस्त 2011 को चारो जिलों रानीखेत, डीडीहाट, यमुनोत्री तथा कोटद्वार की घोषणा होने के बाद आज तक किसी भी सरकार ने जिलों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई है। जिस कारण इन घोषित जिलों के निवासी स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। जबकि छोटी प्रशासनिक इकाई बेहतर प्रशासन के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति के आह्वान पर घोषित चारो जिलों रानीखेत, डीडीहाट, यमुनोत्री तथा कोटद्वार में एक साथ 24 अगस्त को सायं 6 बजे मशाल जुलुस निकालकर सरकार को जगाया जायेगा।

रानीखेत जिले की मांग देश के पहले उपचुनाव के समय से की जा रही है। शहर ने आंदोलनों के कई दौर देखने के बाद 2011 में जिले कि घोषणा से एक स्वप्न के साकार होने का अनुभव हुआ था, लेकिन इसके बाद इसे ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया। इन जिलों के निवासियों को उम्मीद थी। कि चुनाव से पहले सरकार द्वारा 15 अगस्त तक इन जिलों की घोषणा कर दी जाएगी, लेकिन अब तक किसी तरह की कोई हलचल शासन में दिखाई नहीं दे रही है। जिससे अब सभी उम्मीदे धराशायी हो गयी है। इसलिए अति आवश्यक हो गया है कि सरकार को जगाने के लिए पुनः आंदोलन का सहारा लिया जाये।

इसी को ध्यान में रखकर चार घोषित जिलों की संघर्ष समिति ने एक साथ 24 अगस्त को सायं 6 बजे मशाल जुलुस का आयोजन करने का फैसला लिया है। समिति के संरक्षक डी एन बड़ोला ने रानीखेत की जनता से निवेदन किया है। कि अधिक से अधिक संख्या में इस कार्यक्रम में भागीदारी सुनिश्चित करे। और इस मशाल जुलूस को सफल बनाएं।

समिति के संरक्षक डी एन बड़ोला ने बताया कि चारों जिलों में एक साथ आंदोलन करने से सरकार पर दबाव बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि मशाल जुलूस कार्यक्रम के बाद चारों जिलों की घोषित समिति द्वारा आगे की रणनीति पर विचार किया जायेगा।

बलवंत सिंह रावत

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